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मालखरौदा क्षेत्र के अनेक गांव मे अवैध महुआ शराब तैयार कर धड़ल्ले से बेचा जा रहा है

जिला शक्ति थाना मालखरौदा क्षेत्र में अवैध महुआ शराब दारू तैयार कर धड़ल्ले से बेचा जा रहा है, शराब दारु  उद्योग का रूप ले लिया है क्षेत्रों में भयंकर रूप धारण कर चुकी है फलस्वरुप खुले आम बेची जा रही है अवैध शराब दारू जिसे और नशीला बनाने के लिए और तैयार करने में सल्फेट , यूरिया ,,सहित अन्य अनेक जहरीली दवा और और कीटनाशक रासायनिक पदार्थो , ।का भी जमकर प्रयोग और उपयोग किया जाता है , और क्वांटिटी अधिक पढ़ने पर उक्त शराब और  हो जाते हैं फल स्वरुप उक्त जहरीले अवैध महुआ जावा शराब एवं  पदार्थ पीने से लोगों की मृत्यु भी हो जाती है , उक्त मादक पदार्थों की वजह से प्रत्येक दिन अपराधिक घटनाएं मारपीट , हत्या, बलात्कार, चोरी , डकैती आदि घटनाएं घटती रहती है, उक्त मादक पदार्थो की वजह से सैकड़ो परिवार यहां कंगाली के कगार पर पहुंच चुके हैं, साथ ही साथ कई परिवार शराब दारु  और जुआ के कारण बुरी तरह बर्बाद हो चुके हैं, और तो और सरकार की दोहरी नीति ने तो इस क्षेत्र की गरीब जनता को कंगाली के कगार पर पहुंचने में कोई कसर नहीं छोड़ी है , एक तरफ सरकार लाखों करोड़ों रुपया खर्च कर , शराब जहर है , शराब गरीबी बीमारी और तबाही लाती है , शराब का जो हुआ शिकार उजड़ा उसका घर संसार आदि अनेक आकार प्रकार के विज्ञापनों और जागरूकता फैलाने में खर्च करती है, और इसके बचाव के लिए नशाखोरी रोकने के उद्देश्य से विभिन्न प्रकार के आकर्षक एवं लुभाने विज्ञापन पत्र पत्रिकाओं में , पंपलेट पोस्टर आदि में प्रकाशित कर समय-समय पर जनसंपर्क विभाग एवं एनजीओ , संगठनों द्वारा प्रचार प्रसार करवाती रहती है , वहीं दूसरी ओर करोड़ों करोड़ों रुपए के राजस्व प्राप्ति हेतु देसी दारू भट्टी , देसी शराब , विदेशी शराब, बीयर बार , आदि के लिए लाइसेंस भी निर्गत करती है , उक्त दोहरी नीति ने छत्तीसगढ के भोली भाली गरीब जनता को गुमराह कर कंगाली के कगार पर पहुंचा दिया है , नशाखोरों के पास इतना सोचने का वक्त और समय कहां होता है , फलस्वरुप नशाखोर अवैध और घटिया शराब दारु हडिया पी पीकर बीमार पड़ रहे हैं और कल के गाल में समा जा रहे हैं, उक्त अवैध धंधे को फलता फूलता देखकर उक्त समस्त क्षेत्र में अवैध जावा महुआ शराब दारू, आदि एवं मादक पदार्थों का अवैध धंधा गली-गली चौक चौराहों, बस स्टैंड, आदि स्थानों पर बेखौफ धड़ल्ले से कुटीर उद्योग की तरह खुला खेल खेला जा रहा है , चाहे पान की घूमती हो या किरण की दुकान चाहे जीवन रक्षक दवा की दुकान आदि ऐसी कोई जगह नहीं बच्ची जहां उक्त धंधा नहीं चलाया जा रहा हो,जहां दूध दही की गंगा बहा करती थी, आज मालखरौदा एवं आसपास के क्षेत्र में शराब दारू हडिया आदि मादक नशीले पदार्थो की गंगा बह रही है । उक्त धंधा थाना मालखरौदा के विभिन्न क्षेत्रों में सड़क किनारे उक्त महुआ का चुलईया तैयार शराब दारू का खुला खेल, सुबह से , देर रात्रि तक , उक्त अवैध धंधा का खेल खेला जाता हैं , और शराब दारू हडिया पीने पिलाने का दौर चलता रहता है, क्योकि – शाम समस्त –मस्त, हो जाता है, जिसे कोई नहीं है देख हारा,,,?? आबकारी उत्पाद विभाग सब कुछ देख कर , समझ कर , अपने आंखों में पट्टी बंध चुकी है , कभी-कभी आबकारी विभाग (उत्पाद विभाग ) दिखावे के लिए छापामारी जरूर करती है और अवैध जावा महुआ से तैयार चुलईया शराब दारू भी जब्त करती है और तो और उक्त ग्रामीणों के बर्तन तक उठाकर ले आते हैं , लेकिन बाद में मामला सेटिंग गेटिंग , ले – दे – कर उक्त मामले को रफा दफा कर दिया जाता है

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